दिल्ली में ड्राइविंग टैस्ट के लिए बनेंगे 8 नए ट्रैक, ड्राइविंग लाइसेंस मिलेगा जल्दी

हाइलाइट्स
दिल्ली सरकार ने शहर के 8 शिक्षण संस्थानों में ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बनवाने का फैसला किया है. राज्य सरकार स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले आवेदकों के लिए प्रतीक्षा अवधि को कम करने के लिए यह कदम उठा रही है. परिवहन विभाग ने इन नए ऑटोमेटेड परीक्षण ट्रैक के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं. राज्य परिवहन विभाग के पास 13 आरटीओ है जिनके लिए वर्तमान में कुल 10 ऑटोमेटेड ड्राइविंग टैस्ट ट्रैक हैं.
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरकार ने 6 इस काम के लिए आईटीआई और 2 विश्वविद्यालयों के परिसरों में जगह को चुना है. इनमें कश्मीरी गेट में इंदिरा गांधी दिल्ली महिला तकनीकी विश्वविद्यालय (IGDTUW), बवाना में दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DTU) और पूसा, जाफरपुर कलां, मयूर विहार, शाहदरा के अलावा जेल रोड में 6 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को चुना गया है. साथ ही नरेला में जगह को इसी काम के लिए चुना गया है.

ऑटोमेटेड ड्राइविंग परीक्षण ट्रैक पर आवेदकों को 24 तरीकों से परखा जाता है.
नए ऑटोमेटेड ड्राइविंग परीक्षण ट्रैक की लागत लगभग ₹ 10 करोड़ होने की उम्मीद है और सफल बोली के बाद दो महीने में इनकी बनने की संभावना है. इस महीने के अंत तक कंपनी तय करके जनवरी 2022 से निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया जाएगा. परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया, "ये नए ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने वाले आवेदकों के लिए प्रतीक्षा समय को कम करने में मदद करेंगे. वर्तमान में, परीक्षा लेने से पहले प्रतीक्षा अवधि लगभग दो महीने है.”
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ऑटोमेटेड ट्रैक इस तरह से डिज़ाइन किए गए हैं जो परिवहन अधिकारियों को अप-ग्रेडिएंट, फॉरवर्ड -8, रिवर्स-एस और ट्रैफिक जंक्शनों के माध्यम से एक आवेदक ड्राइवर के कौशल का परीक्षण करने देते हैं. आवेदकों को 24 तरीकों से परखा जाता है, जिसमें “S” आकार की सड़क पर वाहन को उलटा ले जाना, पार्किंग, ओवरटेकिंग और चौराहों पर क्रॉसिंग शामिल है.