2026 मारुति सुजुकी ब्रेज़ा रिव्यू : टर्बो इंजन के साथ कितना बदला अनुभव?

हाइलाइट्स
- टर्बो इंजन के साथ आई नई ब्रेज़ा
- अंडरबॉडी सीएनजी, बड़ा बूट स्पेस
- भारत एनकैप में 5-स्टार रेटिंग
सब-4 मीटर एसयूवी सेगमेंट में ब्रेज़ा हमेशा से सबसे ज़्यादा बिकने वाली गाड़ियों में रही है. लेकिन लंबे समय से इसकी एक कमी की बात होती थी कि इसमें टर्बो पेट्रोल इंजन भी मिलना चाहिए. वहीं सीएनजी खरीदने वाले ग्राहकों की मांग थी कि बूट स्पेस से समझौता न करना पड़े. मारुति सुज़ुकी ने नई ब्रेज़ा फेसलिफ्ट में इन दोनों बातों पर काम किया है.
अब ब्रेज़ा में 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन के साथ 1.0-लीटर बूस्टरजेट टर्बो पेट्रोल इंजन का विकल्प भी मिलता है. वहीं सीएनजी वेरिएंट में अब अंडरबॉडी सिलेंडर दिया गया है, जिससे बूट स्पेस पहले से बेहतर हो गया है. इसके अलावा दोनों इंजन विकल्पों के साथ अब 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स भी मिलता है. हमने नई ब्रेज़ा को चलाकर देखा. कैसी है इसकी नई ड्राइव और नया इंजन, आइए जानते हैं.
डिज़ाइन

डिज़ाइन में बहुत बड़े बदलाव नहीं किए गए हैं. हमारी टेस्ट कार टर्बो बूस्टरजेट वेरिएंट थी, जिसमें ग्रिल पर लाल रंग की हाइलाइट्स, अलग डिज़ाइन के अलॉय व्हील, बूस्टरजेट बैजिंग और हल्के कॉस्मेटिक बदलाव देखने को मिले. फॉग लैंप हाउसिंग में भी थोड़ा बदलाव किया गया है. कुल मिलाकर पहली नज़र में इसे फेसलिफ्ट कहना थोड़ा मुश्किल है. मारुति ने ब्रेज़ा के डिज़ाइन को पूरी तरह बदलने की बजाय उसे हल्का-सा अपडेट किया है.
कैबिन, फीचर्स और सुरक्षा

अंदर का कैबिन पहले जैसा ही परिचित लगता है, लेकिन डैशबोर्ड पर नया रंग और फिनिश दिया गया है. सबसे बड़ा बदलाव नया 10-इंच टचस्क्रीन है, जो काफी शार्प है और अमेज़न एलेक्सा व सुज़ुकी नेविगेशन के साथ अच्छी तरह काम करता है. 360-डिग्री कैमरे की गुणवत्ता भी पहले से बेहतर लगी.
नई ब्रेज़ा में अब वेंटिलेटेड सीटें, ब्लाइंड स्पॉट अलर्ट, रियर क्रॉस ट्रैफिक अलर्ट जैसी नई सुविधाएं भी दी गई हैं. सुरक्षा के लिहाज़ से बेस वेरिएंट से ही 6 एयरबैग, ब्रेक असिस्ट और हिल स्टार्ट असिस्ट मिलते हैं. साथ ही ब्रेज़ा ने भारत एनकैप में 5-स्टार सुरक्षा रेटिंग भी हासिल की है.
इंजन और प्रदर्शन

1.0-लीटर टर्बो इंजन इस सेगमेंट में नया नहीं है, लेकिन सुज़ुकी का बूस्टरजेट अपने स्मूद और तेज़ रफ्तार पकड़ने वाले स्वभाव के लिए जाना जाता है. यही इंजन फ्रोंक्स में भी मिलता है, लेकिन ब्रेज़ा में इसे ज़्यादा पावर और टॉर्क के साथ तैयार किया गया है.
सबसे बड़ा बदलाव यह है कि फ्रोंक्स की तरह यहाँ 5-स्पीड मैनुअल नहीं, बल्कि 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलता है. छठा गियर हाईवे पर इंजन की आरपीएम कम रखने में मदद करता है, जिससे माइलेज की बचत भी होती है. कंपनी के अनुसार यह इंजन 20.47 किमी प्रति लीटर तक का माइलेज दे सकता है.
गियरबॉक्स स्मूद है और मिड-रेंज में इंजन अच्छी ताकत महसूस कराता है. हालांकि फिलहाल टर्बो इंजन के साथ ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प नहीं मिलता. अगर ऑटोमैटिक चाहिए तो 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन चुनना होगा.
आराम और हैंडलिंग

राइड क्वालिटी और हैंडलिंग में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. स्टीयरिंग पहले के मुकाबले थोड़ा भारी महसूस हुआ, जिससे हाईवे पर अच्छा भरोसा मिलता है. वहीं सस्पेंशन अब भी आरामदायक सेटअप के साथ आता है और खराब सड़कों पर झटकों को अच्छी तरह संभाल लेता है.
दूसरे बड़े बदलाव
हालांकि हमने सिर्फ 1.0-लीटर टर्बो इंजन चलाया, लेकिन 1.5-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड इंजन के साथ भी अब 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलता है. वहीं सीएनजी वेरिएंट में अंडरबॉडी फैक्ट्री-फिटेड सिलेंडर मिलने से बूट स्पेस पहले के मुकाबले काफी बेहतर हो गया है. साफ है कि इस बार मारुति ने ग्राहकों की पुरानी शिकायतों पर ध्यान दिया है.
निष्कर्ष

नई ब्रेज़ा का 1.0-लीटर बूस्टरजेट इंजन इसकी सबसे बड़ी खासियत बनकर सामने आता है. अच्छी बात यह है कि यह इंजन (LXI) से वैरिएंट लेकर (ZXI+) तक लगभग सभी वेरिएंट में उपलब्ध है. शुरुआती कीमत ₹7.40 लाख (एक्स-शोरूम) रखी गई है, जिससे यह एक मजबूत वैल्यू-फॉर-मनी विकल्प बन जाती है. हालांकि एक छोटी-सी कमी अब भी महसूस होती है. अगर कंपनी टर्बो इंजन के साथ ऑटोमैटिक गियरबॉक्स का विकल्प भी देती, तो इसका पैकेज और भी ज़्यादा मजबूत हो जाता.
फिर भी अगर आप एक ऐसी कॉम्पैक्ट एसयूवी चाहते हैं जिसमें दमदार टर्बो इंजन, बेहतर फीचर्स और अच्छी व्यवहारिकता मिले, तो नई ब्रेज़ा को नज़रअंदाज़ करना आसान नहीं होगा.













































