SC ने बाइक में पीछे बैठने वालों के लिए अनिवार्य किए सेफ्टी फीचर्स, SIAM की अपील रद्द
SC ने एक बेहद अहम फैसला लिया है जिसमें दो पहिया वाहन के पीछे बैठे यात्री के लिए सुरक्षा उपकरणों को अनिवार्य कर दिया गया है. SC ने SIAM की अपील रद्द करते हुए फैसला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पक्ष में सुनाया है जिसमें ऐसे टू-व्हीलर्स को बैन किया जाएगा जिसमें पीछे बैठे यात्री के लिए सुरक्षा व्यवस्था ना हो.

हाइलाइट्स
- 2008 ऑर्डर के लिखाफ सर्वोच्च न्यायालय ने SIAM की याचिका खारिज की
- SC ने मोटरसाइकल में साड़ीगार्ड दिया जाना अनिवार्य कर दिया गया है
- SIAM ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में अर्ज़ी डाली थी
एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है जिससे सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है और जो बेशक भारत में मोटरसाइकल की बिक्री को प्रभावित करेगा. सुप्राम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है जिसमें मोटरसाइकल के पीछे बैठे यात्री के लिए भी सुरक्षा मापदंडों की पूर्ती को अनिवार्य कर दिया गया है जिसमें साड़ी गार्ड और हैंड ग्रिप्स शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने SIAM की दायर अपील को रद्द कर दिया है जो 2008 में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले के विरोधा में दाखिल की गई थी. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के 2008 में लिए गए फैसले में ऐसे दो-पहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था जिसमें पिछली सीट पर बैठे यात्री के लिए सुरक्षा व्यवस्था ना की गई हो. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बिना साड़ी गार्ड और हैंड ग्रिप्स के बिकने वाले टू-व्हीलर्स को राज्य में बैन कर दिया था.
SIAM ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC में अर्ज़ी डाली थी
दो-पहिया वाहन निर्माता कंपनियों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 2008 में ही सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी डाली थी और उस समय सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया था. सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैकचरर्स (SIAM) ने MP हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एससी में अपील की जिसमें पिछली सीट पर बैठे यात्रियों की सुरक्षा और मोटरसाइकल की बिक्री को लेकर बहस की गई. SIAM का कहना था कि पिछली सीट पर बैठा यात्री हर बार महिला नहीं होती... अब सुप्रीम कोर्ट ने इस अपनी को रद्द करते हुए फैसला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पक्ष में सुनाया है और राज्य में ऐसे वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा जो बिना साड़ी गार्ड और हैंड ग्रिप्स के बेचे जा रहे हैं.
सबसे ज़्यादा असर उन बाइक्स पर पड़ेगा जो भारत में आयात करके बेची जाती हैं
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अबतक ना तो SIAM ने कोई प्रतिक्रिया दी है और ना ही किसी मोटरसाइकल निर्माता कंपनी ने. ज़्यादातक मोटरसाइकल जो भारत में बनाई जाती हैं या देश में असेंबल की जाती हैं, उनमें पहले से साड़ी गार्ड दिया जाता है लेकिन सीट के बीच में कोई हैंड ग्रिप्स नहीं लगाई गई हैं. इस फैसले का सबसे ज़्यादा असर उन बाइक्स पर पड़ेगा जो भारत में आयात करके बेची जाती हैं. अगर यह ऑर्डर सभी बाइक निर्माता कंपनियों के लिए लागू हो गया तो पिछली सीट वाले यात्री के लिए बाइक कंपनियों को इस सुरक्षा पैमानों पर खरा उतरने के लिए इन्हें दोबारा डिज़ाइन करना होगा. इस फैसले से बाइक निर्माता कंपनियों में उथल-पुथल मच गई है और ऐसा लगता है कि इस फैसले के खिलाफ कई और अपील दायर की जा सकती हैं.

दो-पहिया वाहन निर्माता कंपनियों ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ 2008 में ही सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी डाली थी और उस समय सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया था. सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैकचरर्स (SIAM) ने MP हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एससी में अपील की जिसमें पिछली सीट पर बैठे यात्रियों की सुरक्षा और मोटरसाइकल की बिक्री को लेकर बहस की गई. SIAM का कहना था कि पिछली सीट पर बैठा यात्री हर बार महिला नहीं होती... अब सुप्रीम कोर्ट ने इस अपनी को रद्द करते हुए फैसला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के पक्ष में सुनाया है और राज्य में ऐसे वाहनों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा जो बिना साड़ी गार्ड और हैंड ग्रिप्स के बेचे जा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अबतक ना तो SIAM ने कोई प्रतिक्रिया दी है और ना ही किसी मोटरसाइकल निर्माता कंपनी ने. ज़्यादातक मोटरसाइकल जो भारत में बनाई जाती हैं या देश में असेंबल की जाती हैं, उनमें पहले से साड़ी गार्ड दिया जाता है लेकिन सीट के बीच में कोई हैंड ग्रिप्स नहीं लगाई गई हैं. इस फैसले का सबसे ज़्यादा असर उन बाइक्स पर पड़ेगा जो भारत में आयात करके बेची जाती हैं. अगर यह ऑर्डर सभी बाइक निर्माता कंपनियों के लिए लागू हो गया तो पिछली सीट वाले यात्री के लिए बाइक कंपनियों को इस सुरक्षा पैमानों पर खरा उतरने के लिए इन्हें दोबारा डिज़ाइन करना होगा. इस फैसले से बाइक निर्माता कंपनियों में उथल-पुथल मच गई है और ऐसा लगता है कि इस फैसले के खिलाफ कई और अपील दायर की जा सकती हैं.
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