टाटा सिएरा ईवी रिव्यू: पहचान सिएरा की, अनुभव पूरी तरह नया

हाइलाइट्स
- पेट्रोल-डीज़ल मॉडल से बिल्कुल अलग इलेक्ट्रिक अनुभव
- टाटा के नए acti.ev+ प्लेटफॉर्म पर तैयार
- RWD और QWD, दोनों विकल्प उपलब्ध
कॉम्पैक्ट एसयूवी सेगमेंट पहले से ही पेट्रोल, टर्बो पेट्रोल और डीज़ल मॉडलों से भरा हुआ है. अब इसी सेगमेंट में इलेक्ट्रिक एसयूवी की मांग भी लगातार बढ़ रही है. ऐसे में टाटा मोटर्स अपनी सातवीं इलेक्ट्रिक कार, सिएरा ईवी लेकर आई है.
दिलचस्प बात यह है कि इसमें सिर्फ सिएरा का नाम और पहचान ही नहीं, बल्कि उसका आइकॉनिक डिज़ाइन भी बरकरार रखा गया है. लेकिन इसके नीचे की पूरी कहानी बदल चुकी है. नया प्लेटफॉर्म, डुअल मोटर वाला QWD (ऑल-व्हील ड्राइव), नई तकनीक और बिल्कुल अलग ड्राइविंग अनुभव इसे पेट्रोल-डीज़ल सिएरा से पूरी तरह अलग बनाते हैं. तो क्या नई सिएरा ईवी सिर्फ पुरानी यादों का सहारा है या फिर अपने दम पर भी खरी उतरती है. आइए जानते हैं.
डिज़ाइन
डिज़ाइन इसकी सबसे बड़ी पहचान है. पहली नज़र में यह बिल्कुल सिएरा जैसी ही दिखाई देती है. बॉक्सी लुक, सीधा सिल्हूट और वही आइकॉनिक डिज़ाइन इसे तुरंत पहचान दिलाते हैं.
फर्क सिर्फ कुछ जगहों पर नज़र आता है. आगे बंद बॉडी कलर ग्रिल, नया बंपर, ईवी और QWD बैजिंग.अलॉय व्हील का डिज़ाइन भी काफी हद तक पेट्रोल-डीज़ल मॉडल जैसा ही है. कुल मिलाकर टाटा ने सिएरा की पहचान से कोई समझौता नहीं किया है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है.
इंटीरियर और सुविधाएं
केबिन में बैठते ही आपको पेट्रोल-डीज़ल सिएरा जैसा ही माहौल मिलता है. वही डैशबोर्ड, तीन स्क्रीन वाला लेआउट, वही स्टीयरिंग और आरामदायक सीटें.हालांकि इलेक्ट्रिक होने की वजह से इसमें कुछ अतिरिक्त सुविधाएं दी गई हैं. जैसे चाबी से अपने आप पार्क होने की सुविधा, NFC कार्ड से प्रवेश, 360 डिग्री के साथ 540 डिग्री कैमरा, रिवर्स असिस्ट और V2L जैसी सुविधाएं, जो पेट्रोल और डीज़ल सिएरा में नहीं मिलतीं. 
इसके अलावा पीछे बड़ा बूट और आगे फ्रंक भी मिलता है, जिससे सामान रखने की जगह और बढ़ जाती है. पांच लोगों के लिए इसका केबिन काफी आरामदायक महसूस होता है.
ड्राइविंग अनुभव
सिएरा ईवी की सबसे अच्छी बात इसका ड्राइविंग पोज़िशन है. चालक की सीट से आगे का बोनट साफ दिखाई देता है और सामने का दृश्य भी खुला-खुला महसूस होता है.
चूंकि यह इलेक्ट्रिक एसयूवी है, इसलिए इंजन की आवाज़ नहीं आती. अगर आपने पहले सिएरा का पेट्रोल या डीज़ल मॉडल चलाया है, तो इसका अनुभव बिल्कुल अलग लगेगा. केवल टायर और हवा की हल्की आवाज़ सुनाई देती है.
परफॉर्मेंस इसकी सबसे बड़ी ताकत है. डुअल मोटर QWD वेरियंट सिर्फ 5.8 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ लेता है, जिससे यह अब तक की सबसे तेज़ भारतीय कार बन जाती है.
हैंडलिंग भी प्रभावित करती है. बैटरी फर्श के नीचे होने की वजह से गुरुत्वाकर्षण केंद्र नीचे रहता है, जिससे तेज़ रफ्तार पर स्थिरता अच्छी मिलती है और बॉडी रोल भी कम महसूस होता है. सस्पेंशन शहर में आरामदायक है, जबकि ऊंची रफ्तार पर थोड़ा सख्त महसूस होता है, जिससे गाड़ी का संतुलन बना रहता है.
ऑफ-रोड क्षमता
स्टैंडर्ड मॉडल रियर-व्हील ड्राइव के साथ आता है, लेकिन QWD वैरिएंट में दो मोटर मिलती हैं, जो इसे ऑल-व्हील ड्राइव बनाती हैं.इसके साथ अलग-अलग टेरेन मोड भी दिए गए हैं, जिससे खराब रास्तों पर पकड़ बेहतर मिलती है. हल्की-फुल्की ऑफ-रोडिंग के लिए यह पहले से ज्यादा सक्षम महसूस होती है. हालांकि ग्राउंड क्लीयरेंस, एप्रोच एंगल और सड़क वाले टायरों की सीमाओं का ध्यान रखना जरूरी रहेगा. यह कोई हार्डकोर ऑफ-रोडर नहीं है.
रेंज
सिएरा ईवी में 63 kWh और 75 kWh के दो बैटरी पैक मिलते हैं. हमने 75 kWh वाले QWD वेरिएंट को चलाया.हमारी शुरुआती ड्राइव के आधार पर यह शहर में 400 किलोमीटर से ज्यादा की वास्तविक रेंज देने में सक्षम लगती है. वहीं अगर आप 75 kWh वाला RWD वैरिएंट चुनते हैं, तो उससे और ज्यादा रेंज मिलने की उम्मीद है. हालांकि उसमें टॉर्क थोड़ा कम मिलेगा, लेकिन जिन लोगों की प्राथमिकता ज्यादा दूरी तय करना है, उनके लिए RWD बेहतर विकल्प साबित हो सकता है.
निष्कर्ष
सिएरा ईवी सिर्फ दिखने में सिएरा है, क्योंकि इसके नीचे की पूरी तकनीक बिल्कुल नई है. यह हैरियर ईवी वाले ही प्लेटफॉर्म पर बनी है, लेकिन करीब ₹3 लाख कम शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है. इसके बावजूद इसमें फीचर्स, आराम और रेंज के मामले में कोई बड़ी कमी महसूस नहीं होती.
अगर आपका बजट अनुमति देता है, तो QWD वैरिएंट अपनी दमदार परफॉर्मेंस, बेहतर पकड़ और अतिरिक्त क्षमताओं की वजह से सबसे आकर्षक विकल्प बनता है. वहीं अगर आपकी प्राथमिकता लंबी रेंज है, तो 75 kWh वाला RWD वैरिएंट भी एक समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है. इसमें टॉर्क थोड़ा कम मिलता है, लेकिन एक बार चार्ज करने पर ज्यादा दूरी तय करने का फायदा मिलता है.













































