2026 फोक्सवैगन टाइगुन 1.0 AT माइलेज टेस्ट, 1 लीटर पेट्रोल में कितना देती है?

हाइलाइट्स
- नए अपडेट के साथ बेहतर फीचर्स
- नया 8-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक
- इंजन में कोई बदलाव नहीं
कुछ महीनों पहले ही हमें स्कोडा कुशक को चलाने का मौका मिला था और अब उसी पर आधारित नई टाइगुन को हमने लंबे सफर में परखा. हमारा सफर उदयपुर से शुरू हुआ और जयपुर तक खत्म हुआ.
इस करीब 400 किमी के सफर में हमने इसके दोनों वर्जन को चलाया, लेकिन आज हम बात करेंगे टाइगुन के 1.0 AT की. क्योंकि कंपनी का कहना है कि अब 6-स्पीड की जगह 8-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर यूनिट बेहतर माइलेज देने में भी सक्षम है.
इसी को जांचने के लिए हम 4 यात्रियों के साथ, पूरी तरह भरी गाड़ी में, 48 डिग्री की गर्मी में फुल एसी के साथ माइलेज टेस्ट पर निकले कि, यह 1 लीटर में कितना देती है?
डिजाइन
डिजाइन में ज्यादा बड़े बदलाव देखने को नहीं मिलते. सामने की तरफ अब इल्यूमिनेटेड ग्रिल और फोक्सवैगन का लोगो दिया गया है, जो पहले से अलग नजर आता है. हेडलैम्प्स का डिजाइन भी बदला गया है और अब ये थोड़े ज्यादा शार्प हैं. साथ ही फॉग लैंप्स हटा दिए गए हैं, जो इसे थोड़ा नया रूप देते हैं.
बाकी डिजाइन पहले जैसा ही कॉम्पैक्ट है. जहां इस सेगमेंट में ह्यून्दे क्रेटा , किया सेल्टॉस , रेनॉ डस्टर जैसी गाड़ियां बड़े आकार में आती हैं, वहीं टाइगुन आज भी अपने छोटे आकार के साथ अलग पहचान बनाए रखती है.
कैबिन और फीचर्स
कैबिन में भी कुछ नए फीचर्स देखने को मिलते हैं. टॉप मॉडल में नई टचस्क्रीन, पैनोरमिक सनरूफ और बड़ा ड्राइवर डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन की सुविधा मिलती है.
फीचर्स बढ़ने की वजह से यह अब ज्यादा आकर्षक लगती है, लेकिन फिर भी इसमें 360 डिग्री कैमरा और ADAS (एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम ) जैसे फीचर्स की कमी महसूस होती है.सुरक्षा के मामले में 6 एयरबैग और ट्रैक्शन कंट्रोल जैसे फीचर्स को स्टैंडर्ड किया गया है, और इसने ग्लोबल एनकैप क्रैश टेस्ट में 5-स्टार रेटिंग हासिल की है.
इंजन और ट्रांसमिशन
इंजन में कोई बदलाव नहीं किया गया है. पहले की तरह ही इसमें 1.0 लीटर TSI और 1.5 लीटर TSI इंजन के विकल्प मिलते हैं, जो अपने-अपने तरीके से अच्छा प्रदर्शन करते हैं.लेकिन बड़ा बदलाव ट्रांसमिशन में किया गया है. पहले जहां 1.0 TSI इंजन के साथ 6-स्पीड ऑटोमैटिक मिलता था, अब उसकी जगह 8-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक दिया गया है.
अतिरिक्त गियर होने की वजह से इंजन ज्यादा समय तक अपने सही पावर बैंड में बना रहता है, जिससे एक्सीलरेशन ज्यादा स्मूद और संतुलित महसूस होता है. शहर में यह गियरबॉक्स काफी शांत और आरामदायक लगता है, खासकर ट्रैफिक में कम झटकों के साथ.
हाईवे पर यह गाड़ी कम RPM पर आराम से चलती है, जिससे केबिन शांत रहता है और ईंधन की खपत भी बेहतर हो सकती है. गियर शिफ्ट भी काफी स्मूद हैं और ज्यादा महसूस नहीं होते, जिससे ड्राइविंग अनुभव आरामदायक बनता है. 1.0 TSI इंजन 114 bhp की पावर और 178 Nm का टॉर्क देता है.
माइलेज टेस्ट
सफर की शुरुआत में हमने ट्रिप मीटर को रीसेट किया और पहले इसे शहर में थोड़ी देर चलाकर फिर हाईवे की ओर निकल गए.हमने टाइगुन 1.0 AT को लगभग 118 km तक 4 लोगों के साथ चलाया. जब फ्यूल भरवाया गया, तो इसमें 8.30 लीटर पेट्रोल लगा.
इसका मतलब है कि इसने हमें करीब 14.2 kmpl का माइलेज दिया.
यह माइलेज खराब नहीं कहा जा सकता, क्योंकि गाड़ी पूरी तरह भरी हुई थी, AC लगातार चल रहा था और हमने गाड़ी को अच्छे से परखा भी.सामान्य परिस्थितियों में आप इससे 15+ kmpl का माइलेज उम्मीद कर सकते हैं.
राइड और हैंडलिंग
टाइगुन की सस्पेंशन सेटिंग थोड़ी सख्त जरूर महसूस होती है, खासकर खराब सड़कों पर.लेकिन यही सख्ती इसे हाईवे पर काफी स्थिर और संतुलित बनाती है. हैंडलिंग सटीक है और स्टीयरिंग से अच्छा फीडबैक मिलता है, जिससे मोड़ों पर गाड़ी पर अच्छा नियंत्रण बना रहता है.
हमारे साथ बैठे यात्रियों ने भी यही महसूस किया कि इसकी राइड और हैंडलिंग इसे खास बनाती है.
निष्कर्ष
कुल मिलाकर फॉक्सवैगन टाइगुन 1.0 TSI में फीचर्स जरूर बढ़ाए गए हैं, लेकिन आज भी यह अपने कुछ प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले फीचर लिस्ट में थोड़ी पीछे रह जाती है.
लेकिन अगर आपकी प्राथमिकता बेहतर परफॉर्मेंस, मजबूत बिल्ड क्वालिटी और शानदार ड्राइविंग अनुभव है, तो टाइगुन आज भी एक ऐसा विकल्प है जो आपको निराश नहीं करेगी.क्योंकि इसमें वह सभी जरूरी गुण मौजूद हैं, जो एक संतुलित और भरोसेमंद कार में होने चाहिए.













































