मारुति सुज़ुकी ने खरखौदा में नए प्रोडक्शन प्लांट का किया उद्घाटन, सालाना निर्माण क्षमता बढ़कर होगी 10 लाख

हाइलाइट्स
- खरखोदा भारत में मारुति सुजुकी का चौथा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट बन गया है
- इस प्लांट की शुरुआती प्रोडक्शन क्षमता 5 लाख यूनिट है, जो सालाना 10 लाख यूनिट तक पहुंच जाएगी
- इस साइट पर कुल निवेश रु.35,000 करोड़ तक पहुंच जाएगा
मारुति सुज़ुकी ने हरियाणा के खरखौदा में अपना नया प्लांट खोल दिया है, जो भारत में उसकी चौथी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है. इस फैक्ट्री की शुरुआती सालाना क्षमता 5 लाख गाड़ियां बनाने की है और आगे चलकर इसे हर साल 10 लाख यूनिट बनाने के लिए बढ़ाया जाएगा. इस प्लांट का उद्घाटन नई दिल्ली में इंडिया-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए किया.
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800 एकड़ में फैले खरखौदा प्लांट को एक इंटीग्रेटेड सप्लायर पार्क के साथ विकसित किया गया है और सभी चरण पूरे होने पर इसमें कुल रु.35,000 करोड़ का निवेश होगा. मारुति सुजुकी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट से 21,000 से ज़्यादा नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है.

यह नई सुविधा सुज़ुकी के "स्मार्ट फ़ैक्ट्री कॉन्सेप्ट" के आधार पर बनाई गई है. इसमें डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल करके ऑपरेशन्स को रियल-टाइम में मॉनिटर किया जाता है और प्रोडक्शन लाइन की क्षमता बढ़ाई जाती है. मारुति सुज़ुकी का कहना है कि यह फ़ैसिलिटी अपनी बिजली की पूरी ज़रूरत सोलर पावर और ग्रीन एनर्जी जैसे रिन्यूएबल सोर्स से पूरी करती है. कंपनी खरखोदा में एक इन-प्लांट रेलवे साइडिंग बनाने की भी योजना बना रही है, ताकि तैयार गाड़ियों को रेल से भेजा जा सके; ठीक वैसे ही जैसे मानेसर और हंसलपुर में उनकी फ़ैसिलिटीज़ में होता है.

खरखोदा प्लांट के साथ भारत में मारुति सुज़ुकी के कुल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क में चार प्लांट हो गए हैं। गुरुग्राम प्लांट की सालाना क्षमता 5 लाख यूनिट है, जबकि मानेसर प्लांट 9 लाख यूनिट की क्षमता के साथ कंपनी का सबसे बड़ा प्लांट बना हुआ है. गुजरात का हंसलपुर प्लांट अभी 7.50 लाख यूनिट की क्षमता देता है और खरखोदा प्लांट से शुरुआत में 5 लाख यूनिट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ेगी. हंसलपुर में चौथी प्रोडक्शन लाइन शुरू होने के बाद, मारुति सुज़ुकी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक उसकी कुल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता सालाना 29 लाख गाड़ियों तक पहुँच जाएगी.













































