नए CAFE 3 ड्रॉफ़्ट में फ़्यूल की खपत से जुड़े बदले हुए पैरामीटर, स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड के लिए कम डेरोगेशन फ़ैक्टर और भी बहुत कुछ शामिल

- नए ड्राफ्ट में सालाना औसत ईंधन खपत के स्टैंडर्ड को और कड़ा किया गया है
- असली ईंधन खपत का हिसाब लगाते समय स्टॉप/स्टार्ट और माइल्ड-हाइब्रिड जैसी टेक्नोलॉजी को भी शामिल किया जा सकता है
- इसमें कंप्लायंस क्रेडिट बायआउट की नई स्कीम भी जोड़ी गई है
ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) ने आने वाले CAFE 3 (कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी) नियमों के लिए एक नया ड्राफ़्ट जारी किया है, जो अप्रैल 2027 से लागू होंगे. इन नए ड्राफ़्ट में पिछले ड्राफ़्ट की तुलना में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं, जैसे कि हर साल सालाना औसत ईंधन खपत की गणना के लिए कड़े नियम, वैकल्पिक पावरट्रेन के लिए नए 'डेरोगेशन फ़ैक्टर' और डीज़ल में बायोफ़्यूल मिलाने के लिए 'कार्बन न्यूट्रैलिटी फ़ैक्टर' का प्रावधान जोड़ना.
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अपडेट किए गए नियमों में पिछले ड्राफ़्ट के मुकाबले कुछ बदलाव किए गए हैं. इनमें सबसे बड़ा बदलाव कैलकुलेशन में इस्तेमाल होने वाले 'कॉन्स्टेंट मल्टीप्लायर' (CM) को कम करना है. जहाँ पिछले ड्राफ़्ट में CM को 0.002 l/100 km प्रति kg तय किया गया था, वहीं FY2028 के लिए इसे घटाकर 0.00158 कर दिया गया है और FY2032 तक यह हर साल घटकर 0.00131 हो जाएगा.
वज़न के लिए तय कॉन्स्टेंट को 1170 kg से बढ़ाकर 1229 kg कर दिया गया है. इसी तरह, फ़्यूल की खपत के लिए तय कॉन्स्टेंट 3.9960 l/100 km प्रति kg से शुरू होकर FY2032 के लिए 3.3273 l/100 km प्रति kg हो जाता है - जो FY2028 के लिए पहले सुझाए गए 3.7264 और FY2032 के लिए 3.019 से ज़्यादा है.
कुल गणना का फ़ॉर्मूला वैसा ही बना हुआ है.
कुल हिसाब-किताब के नज़रिए से देखें तो, कम CM और ज़्यादा वज़न कॉन्स्टेंट (वेट कंस्टेंट) की वजह से, मोटे तौर पर किए गए पिछले ड्राफ़्ट के हिसाब-किताब की तुलना में 'औसत ईंधन खपत मानक' (एवरेज फ्यूल कंसेंप्शन स्टैंडर्ड) कम होता दिख रहा है. इस फ़ॉर्मूले में CM को 'सालाना वेटेड औसत अनलेडन मास' (एनुअल वेटेड एवरेज अनलेडन मॉस) और 'वज़न कॉन्स्टेंट' के अंतर से गुणा करना होता है. इसमें 'फ़िक्स्ड ईंधन खपत कॉन्स्टेंट' को जोड़ा जाता है. इसलिए, अगर वेटेड औसत अनलेडन मास 2500 kg हो, तो FY2028 के लिए हिसाब इस तरह होगा.
| करेंट ड्रॉफ्ट | पिछला ड्रॉफ्ट | |
| इक्वेशन | 0.00158 x (2500-1229) + 3.9960 | 0.002 x (2500-1170) + 3.7264 |
| टोटल | 6.00418 l/100किमी | 6.3864 l/100किमी |
ईंधन की खपत की गणना में नई तकनीकों को शामिल करने के लिए रास्ते खुलते हैं
नए ड्रॉफ़्ट में 'परफ़ॉर्मेंस असेसमेंट' के तहत एक नई शर्त जोड़ी गई है. इससे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को माइल्ड-हाइब्रिड टेक्नोलॉजी जैसी चीज़ों के लिए 'ईंधन की खपत में कमी को प्रमाणित करने के लिए अलग से सही सर्टिफ़िकेशन तरीक़े विकसित करने' की अनुमति मिलेगी.
नए नियम में कई तरह की टेक्नोलॉजी शामिल हैं, जैसे इंजन स्टॉप-स्टार्ट, टायर प्रेशर मॉनिटरिंग, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग, 6 या उससे ज़्यादा फॉरवर्ड रेश्यो वाले गियरबॉक्स का इस्तेमाल, 12/48 V मोटर जेनरेटर (माइल्ड हाइब्रिड टेक), LED एक्सटीरियर लाइटिंग, हाई-एफिशिएंसी AC सिस्टम और सोलर-रिफ्लेक्टिव पेंट. इन टेक्नोलॉजी को कुछ कम से कम ज़रूरी शर्तों को पूरा करना होगा, जैसे स्टॉप-स्टार्ट सिस्टम के लिए एक्टिवेशन का समय 2 सेकंड या उससे कम होना, रीजेनरेटिव ब्रेकिंग के लिए MIDC पर 6% या उससे ज़्यादा एनर्जी रिकवरी और माइल्ड हाइब्रिड टेक के लिए कम से कम 78% मोटर एफिशिएंसी.
डीज़ल के लिए कार्बन न्यूट्रैलिटी फ़ैक्टर जोड़ा गया
पिछले ड्रॉफ़्ट के मुकाबले एक और अपडेट यह है कि इसमें कार्बन न्यूट्रैलिटी फ़ैक्टर (CNF) के तहत डीज़ल के लिए एक क्लॉज़ जोड़ा गया है. डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि ‘डीज़ल गाड़ियों के लिए, टेलपाइप से होने वाले CO2 उत्सर्जन पर CNF, MoPNG (पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय) द्वारा बताए गए बायोफ़्यूल ब्लेंडिंग प्रतिशत के अनुसार होगा.’ CNG, फ़्लेक्स फ़्यूल और E20 गाड़ियों के उलट, इसके लिए अभी तक कोई CNF% नहीं बताया गया है.
अन्य छोटे बदलावों में कार्बन न्यूट्रैलिटी फैक्टर (8%; अगर इंजन फ्लेक्स फ्यूल का इस्तेमाल करता है तो 22.3%) के लिए इथेनॉल-ब्लेंडेड पेट्रोल के साथ SHEV और PHEV शब्दों को जोड़ना शामिल है, जबकि इथेनॉल ब्लेंड्स की ऊपरी सीमा को खुला रखा गया है - जबकि पुराने ड्राफ्ट में केवल E20 से E30 का ज़िक्र था. ड्राफ्ट में स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ियों (नॉन-फ्लेक्स-फ्यूल) के लिए सुपर क्रेडिट्स के वॉल्यूम डेरोगेशन फैक्टर को भी 2.0 से घटाकर 1.6 कर दिया गया है, जिससे असल फ्यूल खपत के सालाना औसत की गणना पर असर पड़ेगा.
अनुपालन क्रेडिट (कंप्लायंस क्रेडिट) की गणना के लिए सालाना औसत ईंधन खपत और वास्तविक ईंधन खपत के सालाना औसत के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाएगा. वास्तविक ईंधन खपत कम होने का मतलब है निर्माता के लिए अतिरिक्त क्रेडिट मिलना, और इसके उलट होने पर स्थिति भी उलट होगी.
नई क्रेडिट बायआउट योजना
अनुपालन क्रेडिट स्कीम को जारी रखते हुए, नया ड्राफ्ट निर्माताओं को डेबिट बैलेंस की भरपाई के लिए BEE से अनुपालन क्रेडिट खरीदने की अनुमति देता है. वित्त वर्ष 2028 के लिए हर क्रेडिट की कीमत ₹2,500 प्रति gCO2 प्रति km होगी, जो वित्त वर्ष 2032 में बढ़कर ₹4,500 हो जाएगी.
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