E20 फ्यूल में मिलावट: कार बनाने वाली कंपनियों ने क्लोराइड और नमी के स्तर को लेकर जताई चिंता

हाइलाइट्स
- खबरों के मुताबिक, 18 राज्यों के सैंपल में क्लोराइड का ज़्यादा कंटैमिनेशन पाया गया
- कुछ राज्यों में नमी का स्तर भी तय मानक से ज़्यादा पाया गया
- सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि ईंधन में कंटैमिनेशन की कोई व्यापक समस्या नहीं है
भारत में E20 पेट्रोल अपनाने के साथ ही, गाड़ी चलाने वालों के मन में अपनी गाड़ियों पर इसके असर को लेकर चिंताएँ भी बढ़ रही हैं. अब, देश की कुछ सबसे बड़ी कार बनाने वाली कंपनियों के बीच हो रही अंदरूनी बातचीत से पता चलता है कि इंडस्ट्री इस बदलाव के एक और पहलू पर भी बारीकी से नज़र रख रही है, और वह है गाड़ियों तक पहुँचने वाले ईंधन की क्वालिटी.
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रॉयटर्स के अनुसार, मारुति सुज़ुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा के अधिकारी E20 फ़्यूल के सैंपल में मिली मिलावट, खासकर क्लोराइड और नमी के बढ़े हुए स्तर पर चर्चा कर रहे थे.

इंडस्ट्री की ये जानकारी, जो पहले सामने नहीं आई थी, एक साल के दौरान पंपों से लिए गए 250 से ज़्यादा फ़्यूल सैंपल पर आधारित थी. इसमें भारत के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 21 को शामिल किया गया था. इकट्ठा किए गए डेटा के अनुसार, 18 राज्यों के कई सैंपल में क्लोराइड की ज़्यादा मात्रा पाई गई, जबकि कुछ मामलों में नमी भी बहुत ज़्यादा मिली. क्लोराइड की मात्रा में काफ़ी अंतर देखा गया.
राजस्थान से लिए गए सैंपल में क्लोराइड की मात्रा 6ppm से 570ppm के बीच पाई गई, जबकि नई दिल्ली में इकट्ठा किए गए सैंपल में यह मात्रा 1.4ppm से 420ppm के बीच थी. महाराष्ट्र में, यह रेंज 10ppm से 357ppm के बीच थी. जानकारी के लिए बता दें कि क्लोराइड के लिए सरकार की तय सीमा 3ppm है.
मारुति सुज़ुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव अनूप भट ने एक इंटरनल ईमेल में क्लोराइड से जुड़ी जानकारी का ज़िक्र किया और बताया कि इस मुद्दे पर पेट्रोलियम मंत्रालय के साथ भी बातचीत हुई थी. भट ने कहा कि अभी इस्तेमाल हो रहे फ्यूल इंजेक्टर ज़्यादा से ज़्यादा 1ppm क्लोराइड की मात्रा को झेल सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि E20 में क्लोराइड की मात्रा 1ppm से कम रखना इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के मुताबिक होगा.

टेस्टिंग में सिर्फ़ क्लोराइड ही एकमात्र समस्या नहीं थी. कुछ सैंपल में नमी का स्तर भी तय सीमा से काफी ज़्यादा पाया गया. इंडस्ट्री के डेटा के अनुसार, आंध्र प्रदेश में नमी का स्तर 13,000ppm और उत्तर प्रदेश में 12,500ppm तक दर्ज किया गया। सरकार का बेंचमार्क 3,000ppm है.
SIAM ने पहले कहा था कि क्लोराइड की ज़्यादा मात्रा से ऑटोमोटिव पार्ट्स में जंग लग सकता है, जबकि फ्यूल में बहुत ज़्यादा नमी होने पर कुछ मामलों में गाड़ी में फ्यूल भरवाने के तुरंत बाद ही वह बंद हो सकती है या चल नहीं पाएगी.
अभी भी यह साफ़ नहीं है कि फ़्यूल सप्लाई में अशुद्धियाँ कहाँ से आ रही हैं. SIAM ने अपनी उस चिट्ठी में, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था, कहा था कि E20 के लागू होने के बाद क्लोराइड के लेवल में बढ़ोतरी देखी गई है. साथ ही, SIAM ने सरकार से तेल मार्केटिंग कंपनियों को इसकी असल वजह का पता लगाने का निर्देश देने के लिए कहा था. नमी के मामले में, SIAM ने रिटेल आउटलेट्स पर अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और पाइपलाइन के ठीक से रखरखाव न होने को एक संभावित वजह बताया था.
अंदरूनी बातचीत में ऑर्गेनिक क्लोराइड को लेकर भी चिंता जताई गई. महिंद्रा के फ़्लूइड्स टेक्नोलॉजी के सीनियर प्रिंसिपल इंजीनियर आर. रामाप्रभु ने इसे इंडस्ट्री में गाड़ियों के तेज़ी से खराब होने की समस्या से जोड़ा. रामाप्रभु ने कहा कि ऑर्गेनिक क्लोराइड के कारण इंजन 200 किलोमीटर के अंदर ही खराब हो सकते हैं, और रीफ़्यूलिंग के तुरंत बाद सामने आए ज़्यादातर मामले इसी वजह से हो सकते हैं.
SIAM ने 28 जुलाई को सरकार को शुरुआती संदेश भेजा, जिसमें मिलावट और गाड़ियों पर इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई थी. बाद में एसोसिएशन ने वह पत्र वापस ले लिया और कहा कि कुछ आंकड़ों की "और पुष्टि" की ज़रूरत थी.
सरकार का आकलन बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करता है. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि SIAM के पत्र सौंपने से करीब दो हफ़्ते पहले ही तेल मार्केटिंग कंपनियों ने रिटेल आउटलेट्स पर ईंधन की सघन जांच शुरू कर दी थी. मंत्री के अनुसार, उन जांचों में मिलावट के केवल चार मामले सामने आए.

सरकारी फ्यूल कंपनियों का भी कहना है कि बड़े पैमाने पर रैंडम और वैज्ञानिक टेस्टिंग में फ्यूल में मिलावट को लेकर चिंता की कोई बात सामने नहीं आई है. इससे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के कुछ हिस्सों में हो रही चर्चा और फ्यूल कंपनियों की टेस्टिंग के नतीजों के बीच काफी अंतर दिखता है.
यहाँ E20 और खराब (contaminated) E20 के बीच का फ़र्क समझना ज़रूरी है. अंदरूनी बातचीत से यह साबित नहीं होता कि 20% इथेनॉल वाला मिश्रण गाड़ियों को नुकसान पहुँचाता है. बल्कि, ये इस बात पर सवाल उठाते हैं कि क्या स्टोरेज या डिस्ट्रीब्यूशन के किसी चरण में क्लोराइड और नमी जैसी अशुद्धियाँ ईंधन में मिल रही हैं.
अब जब E20 पूरे देश में लागू हो गया है और ज़्यादातर पेट्रोल पंपों पर ड्राइवरों के पास कम इथेनॉल वाला पेट्रोल चुनने का विकल्प नहीं बचा है, तो मिलावट के स्तर को लेकर चल रही बहस के कारण ईंधन की क्वालिटी पर ध्यान बना रहने की संभावना है.
सूत्र: Reuters

























































