रेनॉ ग्रुप की 2030 तक भारत में 7 कारें लॉन्च करने की योजना

हाइलाइट्स
- 2030 तक भारत में सात मॉडलों की लाइनअप तैयार करने की योजना है, जो कई सेगमेंट को कवर करेगी
- भारत रेनॉ के वैश्विक परिचालन के लिए एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में कार्य करेगा
- नए RGMP और RGEP प्लेटफॉर्म मल्टी-एनर्जी पावरट्रेन को सपोर्ट करेंगे
रेनॉ ग्रुप ने भारत के लिए एक नया प्रोडक्ट रोडमैप तैयार करके मानो एक नई शुरुआत की है. मुख्य लक्ष्य है इस दशक के अंत तक सात मॉडलों का पोर्टफोलियो तैयार करना है. रेनॉ, जिसके पास वर्तमान में भारत में चार यात्री वाहन हैं, के लिए यह एक तरह से विस्तार योजना है. हाल ही में लॉन्च हुई रेनॉ डस्टर इस लाइनअप का एक प्रमुख स्तंभ होगी, क्योंकि यह भारतीय बाजार में ब्रांड के सबसे लोकप्रिय मॉडलों में से एक है.
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रेनॉ ने ब्रिजर कॉन्सेप्ट काो भी पेश किया, जो भारत के सबसे प्रतिस्पर्धी सेगमेंट में 4 मीटर से कम लंबाई वाली एसयूवी की ओर इशारा करता है. इसका प्रोडक्शन रेडी मॉडल 2027 के अंत तक आने की उम्मीद है, और भारत वैश्विक स्तर पर इसका पहला बाज़ार होगा. इससे टाटा नेक्सॉन, मारुति ब्रेज़ा और ह्यून्दे वेन्यू जैसी कारों को टक्कर मिलने की संभावना है.
ब्रिज्जर में कई पावरट्रेन विकल्प उपलब्ध होंगे, जिनमें पेट्रोल, हाइब्रिड और पूरी तरह से इलेक्ट्रिक विकल्प शामिल हैं. यह भारत के लिए रेनॉ की पहली इलेक्ट्रिक कार होने की उम्मीद है, साथ ही इसमें 1.2 लीटर टर्बो-पेट्रोल इंजन भी दिया जाएगा.

इस नई लाइनअप का आधार दो प्लेटफॉर्म होंगे: RGMP और RGEP. RGMP (रेनॉ ग्लोबल मॉड्यूलर प्लेटफॉर्म) आगामी 7 मॉडलों में से चार का आधार बनेगा, जिनमें डस्टर भी शामिल है.
इसे एसयूवी, हैचबैक और एमपीवी जैसे कई बॉडी स्टाइल को सपोर्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, और यह लगभग 3,990 मिमी से 4,673 मिमी लंबाई तक के वाहनों को एडजेस्ट कर सकता है. यह प्लेटफॉर्म पांच, छह और सात सीटों वाले कॉन्फ़िगरेशन सहित लचीले सीटिंग लेआउट को भी सपोर्ट करता है. इसे मल्टी-पावरट्रेन अप्रोच के साथ बनाया गया है, जिससे रेनॉ एक ही आर्किटेक्चर पर पेट्रोल, हाइब्रिड और ईवी पावरट्रेन पेश कर सकती है.

दूसरी ओर, RGEP (रेनॉ ग्रुप एंट्री प्लेटफॉर्म) का इस्तेमाल लाइनअप में अधिक किफायती मॉडलों के लिए किया जाएगा, जिनकी कीमत संभवतः रु.10 लाख से कम होगी. यह पेट्रोल और सीएनजी इंजन के साथ-साथ AMT और CVT गियरबॉक्स विकल्पों को भी सपोर्ट करता है.
RGMP की तरह, यह भी पांच, छह और सात सीटों वाले लेआउट सहित कई सीटिंग कॉन्फ़िगरेशन की अनुमति देता है, जिससे यह एंट्री-लेवल एमपीवी और हैचबैक के लिए उपयुक्त हो जाता है.

निर्माण के अलावा, रेनॉ भारत को अपनी वैश्विक रणनीति के एक बड़े हिस्से के रूप में स्थापित कर रही है. कंपनी ने चेन्नई स्थित अपने प्लांट का पूर्ण स्वामित्व हासिल कर लिया है और देश को प्रोडक्शन और निर्यात केंद्र के रूप में उपयोग करने की योजना बना रही है.
रेनॉ का लक्ष्य 2030 तक भारत से वाहनों, पुर्जों और इंजीनियरिंग सेवाओं को कवर करते हुए 2 बिलियन यूरो का वार्षिक निर्यात करना है, जिसमें दक्षिण अमेरिका जैसे बाजार प्रमुखता से शामिल हैं.
रेनॉ ग्रुप के सीईओ फ्रांकोइस प्रोवोस्ट के अनुसार, भारत को ब्रांड के वैश्विक विकास के अगले चरण के "केंद्र" में होने की उम्मीद है, ताकि 2030 तक इसे इसके शीर्ष तीन बाजारों में से एक बनाया जा सके.













































