logo
Select City

फास्ट चार्जिंग vs स्लो चार्जिंग: कार बैटरी के लिए क्या बेहतर है?

फास्ट चार्जिंग vs स्लो चार्जिंग: कार बैटरी के लिए क्या बेहतर है?
हाइलाइट्स
  • बैटरी की लंबी उम्र के लिए स्लो एसी चार्जिंग सबसे बेहतर रहती है.
  • बार-बार फास्ट चार्जिंग से बैटरी पर थोड़ा ज्यादा असर पड़ सकता है, लेकिन यह असर बहुत ज्यादा नहीं होता.
  • आज के इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी प्रबंधन प्रणाली बैटरी को सुरक्षित रखने के लिए लगातार काम करती है.

इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले लोगों के मन में सबसे आम सवालों में से एक है कि क्या फास्ट चार्जिंग से बैटरी खराब होती है. यह सवाल जायज भी है. कम समय में सैकड़ों किलोमीटर की रेंज देने वाला चार्जर, रातभर धीरे-धीरे बैटरी चार्ज करने के मुकाबले ज्यादा दबाव डालता हुआ लगता है.

लेकिन असल में कहानी थोड़ी अलग है. आज की इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियां पहले के मुकाबले काफी बेहतर हैं और बैटरी प्रबंधन प्रणाली बैटरी के तापमान, चार्जिंग स्पीड और सेल की स्थिति पर लगातार नजर रखती है. बार-बार डीसी फास्ट चार्जिंग करने से स्लो एसी चार्जिंग के मुकाबले बैटरी पर थोड़ा ज्यादा दबाव पड़ता है, लेकिन इससे बैटरी जल्दी खराब नहीं होती. दोनों चार्जिंग तरीकों को समझकर आप अपनी इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रख सकते हैं.

यह भी पढ़ें. बैटरी-एज-ए-सर्विस की पूरी जानकारी. सब्सक्रिप्शन बैटरी कैसे काम करती है.

स्लो चार्जिंग और फास्ट चार्जिंग में क्या अंतर है?

इलेक्ट्रिक वाहन को चार्ज करने के दो आम तरीके हैं.

स्लो AC चार्जिंग

EV Charging 1

इसका इस्तेमाल आमतौर पर घर, ऑफिस पार्किंग या डेस्टिनेशन चार्जर पर किया जाता है.

आमतौर पर पावर होती है.

  • 3.3 kW
  • 7.2 kW
  • 11 kW

कार एसी बिजली को डीसी पावर में बदलकर बैटरी तक पहुंचाती है. बिजली धीरे-धीरे बैटरी में जाने की वजह से गर्मी भी कम पैदा होती है.

फास्ट डीसी चार्जिंग

EV Charging 2

डीसी फास्ट चार्जर आमतौर पर हाईवे और सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क पर मिलते हैं.

इनकी पावर हो सकती है.

  • 25 kW
  • 50 kW
  • 60 kW
  • 120 kW+
  • 150 kW+

ये चार्जर कार के ऑनबोर्ड चार्जर को बायपास करके हाई-पावर डीसी बिजली सीधे बैटरी तक पहुंचाते हैं. इससे चार्जिंग का समय काफी कम हो जाता है, लेकिन बैटरी के अंदर ज्यादा गर्मी और दबाव पैदा होता है.

क्या फास्ट चार्जिंग से सच में बैटरी खराब होती है?

छोटा जवाब है. हां, लेकिन उतना नहीं जितना आमतौर पर माना जाता है. हजारों इलेक्ट्रिक वाहनों पर की गई हालिया स्टडी से पता चलता है कि नियमित फास्ट चार्जिंग के बावजूद बैटरी की गिरावट काफी सीमित रहती है.

ज्यादातर एसी चार्जिंग. औसत सालाना बैटरी गिरावट. 1.5% प्रति साल.

बार-बार डीसी फास्ट चार्जिंग. औसत सालाना बैटरी गिरावट. 2.5% से 3.0% प्रति साल.

यह अनुमानित आंकड़ा है.

इसका मतलब है कि जो बैटरियां फास्ट चार्जिंग पर ज्यादा निर्भर रहती हैं, उनकी क्षमता थोड़ी तेजी से कम हो सकती है. फिर भी कई सालों के इस्तेमाल के बाद भी ये बैटरियां कंपनी की वारंटी सीमा के अंदर रह सकती हैं. यानी फास्ट चार्जिंग से बैटरी की उम्र थोड़ी तेजी से कम हो सकती है, लेकिन इससे बैटरी अचानक खराब नहीं होती.

EV Charging 3

फास्ट चार्जिंग से बैटरी पर ज्यादा दबाव क्यों पड़ता है?

इसकी सबसे बड़ी वजह है गर्मी. जब बहुत ज्यादा बिजली तेजी से बैटरी में जाती है, तो बैटरी सेल पर ज्यादा दबाव पड़ता है.

इससे हो सकता है.

ज्यादा तापमान.

ज्यादा रासायनिक दबाव.

समय के साथ ज्यादा घिसावट.

बैटरी प्रबंधन प्रणाली इन चीजों पर लगातार नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर चार्जिंग स्पीड कम कर देती है. यही वजह है कि गर्म मौसम में या बैटरी लगभग पूरी भरने पर चार्जिंग स्पीड कम हो जाती है.

EV Charging 4

बैटरी की बनावट क्यों मायने रखती है?

हर इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी फास्ट चार्जिंग पर एक जैसा असर नहीं दिखाती.

LFP बैटरियां

लिथियम आयरन फॉस्फेट यानी एलएफपी बैटरियां आमतौर पर बार-बार चार्जिंग और ज्यादा तापमान को बेहतर तरीके से संभालती हैं. कई किफायती इलेक्ट्रिक वाहनों में अब एलएफपी बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि ये ज्यादा टिकाऊ होती हैं और इनमें गर्मी को संभालने की क्षमता बेहतर होती है.

NMC बैटरियां

निकेल मैंगनीज कोबाल्ट यानी एनएमसी बैटरियां ज्यादा ऊर्जा घनत्व और लंबी ड्राइविंग रेंज देती हैं, लेकिन ये गर्मी और चार्जिंग के दबाव के प्रति थोड़ी ज्यादा संवेदनशील होती हैं. इन बैटरियों के लिए अच्छा कूलिंग सिस्टम और सही चार्जिंग आदतें काफी जरूरी हैं.

EV Charging 5

80% के बाद चार्जिंग धीमी क्यों हो जाती है?

कई इलेक्ट्रिक वाहन मालिक देखते हैं कि बैटरी करीब 80% पहुंचने के बाद चार्जिंग स्पीड काफी कम हो जाती है.

यह बिल्कुल सामान्य है. जैसे-जैसे बैटरी भरती जाती है, कार बैटरी सेल को ज्यादा गर्मी और वोल्टेज के दबाव से बचाने के लिए चार्जिंग स्पीड धीरे-धीरे कम कर देती है.

इससे बैटरी की सेहत बेहतर बनी रहती है. यही वजह है कि कई कंपनियां रोजमर्रा के इस्तेमाल में बैटरी को 100% के बजाय 80% तक चार्ज करने की सलाह देती हैं.

फास्ट चार्जिंग vsस्लो चार्जिंग

दोनों चार्जिंग तरीकों का अपना काम है. गर्मी, चार्जिंग स्पीड और बैटरी पर पड़ने वाले असर को समझकर आप अपनी जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुन सकते हैं.

चार्जिंग स्पीड. स्लो एसी चार्जिंग में धीमी. फास्ट डीसी चार्जिंग में काफी तेज.

गर्मी. स्लो एसी चार्जिंग में कम. फास्ट डीसी चार्जिंग में ज्यादा.

बैटरी पर दबाव. स्लो एसी चार्जिंग में कम. फास्ट डीसी चार्जिंग में ज्यादा.

बेहतर इस्तेमाल. स्लो एसी चार्जिंग रोजाना चार्जिंग के लिए. फास्ट डीसी चार्जिंग लंबी यात्रा और जल्दी चार्ज करने के लिए.

लंबे समय में बैटरी पर असर. स्लो एसी चार्जिंग में कम. फास्ट डीसी चार्जिंग में थोड़ा ज्यादा.

सुविधा. स्लो एसी चार्जिंग में सामान्य. फास्ट डीसी चार्जिंग में बहुत अच्छी.

फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल कब करें?

फास्ट चार्जिंग सबसे ज्यादा काम आती है जब.

लंबी दूरी तय करनी हो.

रोड ट्रिप पर हों.

जल्दी से बैटरी चार्ज करनी हो.

घर पर चार्जिंग की सुविधा न हो.

फास्ट चार्जिंग के लिए ही बनाई गई हैं और आज की इलेक्ट्रिक वाहन इसे संभालने के लिए तैयार हैं. जरूरी यह नहीं है कि फास्ट चार्जिंग से पूरी तरह बचें, बल्कि रोजाना इसकी जरूरत न पड़े, इसका ध्यान रखना ज्यादा बेहतर है.

ज्यादातर इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए सही चार्जिंग आदत

रोजाना इस्तेमाल के लिए स्लो एसी चार्जिंग बेहतर रहती है. घर पर रातभर या ऑफिस के समय इलेक्ट्रिक वाहन चार्ज करने से बैटरी धीरे-धीरे चार्ज होती है और उस पर कम दबाव पड़ता है.

जब यात्रा या सुविधा की जरूरत हो, तब फास्ट चार्जिंग का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तरह सुविधा और बैटरी की लंबी उम्र के बीच अच्छा संतुलन बना रहता है.

बैटरी की उम्र बढ़ाने के आसान तरीके

इन आसान सुझावों से आप अपनी इलेक्ट्रिक वाहन की बैटरी को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रख सकते हैं.

रोजाना एसी चार्जिंग का इस्तेमाल करें

अगर आपके पास घर पर चार्जिंग की सुविधा है, तो इसे अपनी मुख्य चार्जिंग का तरीका बनाएं.

हर दिन 100% तक चार्ज करने से बचें

रोजाना के इस्तेमाल के लिए कई इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां बैटरी को 20% से 80% के बीच रखने की सलाह देती हैं.

बार-बार फास्ट चार्जिंग से बचें

लगातार कई डीसी चार्जिंग सत्र करने पर बैटरी में ज्यादा गर्मी पैदा हो सकती है, खासकर गर्मियों में.

मौसम बहुत ज्यादा गर्म या ठंडा न हो, तब चार्ज करें

बहुत ज्यादा तापमान चार्जिंग सिस्टम और बैटरी सेल दोनों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.

चार्जिंग स्पीड से ज्यादा क्या मायने रखता है?

चार्जिंग की आदतें बैटरी की सेहत पर असर डालती हैं, लेकिन यह अकेला कारण नहीं है.

इन चीजों का भी बैटरी की लंबी उम्र पर काफी असर पड़ता है.

मौसम.

बैटरी कूलिंग सिस्टम.

ड्राइविंग की आदत.

चार्जिंग कितनी बार करते हैं.

बैटरी की बनावट.

इनका असर कई बार चार्जिंग स्पीड जितना ही महत्वपूर्ण हो सकता है.

इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग को समझने का आसान तरीका

असल सवाल यह नहीं है कि फास्ट चार्जिंग बेहतर है या स्लो चार्जिंग. दोनों का अपना काम है. रोजाना इस्तेमाल के लिए स्लो एसी चार्जिंग बेहतर है और बैटरी की लंबी उम्र के लिए भी यही सही विकल्प रहता है. वहीं रोड ट्रिप और जल्दी चार्ज करने के लिए फास्ट चार्जिंग काफी सुविधाजनक है. आज की इलेक्ट्रिक वाहन दोनों तरह की चार्जिंग को संभालने के लिए बनाई गई हैं और कभी-कभार फास्ट चार्जिंग करने से बैटरी की उम्र पर बहुत बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं होती.

ज्यादातर इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए तरीका आसान है. जहां संभव हो एसी चार्जिंग का इस्तेमाल करें, जरूरत पड़ने पर डीसी फास्ट चार्जिंग करें और बैटरी की सुरक्षा का काम बैटरी प्रबंधन प्रणाली पर छोड़ दें.

संबंधित समाचार

नई कारें

आने वाली कारें

ताज़ा ख़बरें और रिव्यू

  • पत्रिका
  • News
  • फास्ट चार्जिंग vs स्लो चार्जिंग: कार बैटरी के लिए क्या बेहतर है?